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आवारा सा वो बादल
पानी भर कर उड़ रहा था
बरसना चाहता था
मतवाला होकर 
चल रहा था
शायद मयख़ाने से आया था
दूर कहीं जाना था
किसी हसीन लबालब 
नदी से मिलना चाहता था

उड़ते-चलते जा टकराया 
उस निर्दोष चाँद से
जो खोया था 
किसी के दीदार में

Full Poem: आवारा सा वो बादल पानी भर कर उड़ रहा था बरसना चाहता था मतवाला होकर चल रहा था शायद मयख़ाने से आया था दूर कहीं जाना था किसी हसीन लबालब नदी से मिलना चाहता था उड़ते-चलते जा टकराया उस निर्दोष चाँद से जो खोया था किसी के दीदार में देख रहा था जो एक दरख़्त को प्यासे से, सूखे से, दीवाने को जिसने आस लगा रखी थी प्यास जगा रखी थी 'किसी' बादल की जैसे ही टकराया वो बादल चाँद से हाथ से उसके बाल्टी सरक गयी भीग गया वो दरख्त रूह उसकी महक गयी चाँद ने आज फ़िर दो प्रेमियों को मिला दिया किसी का सोता भाग जगा दिया भटकते किसी मतवाले राहगीर को घर का पता बात दिया - साकेत गर्ग #HindiPoem #HindiPoetry #हिंदी_कविता #yopowrimo #आवारा #बादल #cloud #पानी #water #मतवाला #नदी #river #निर्दोष #चाँद #Moon #दीदार #दरख़्त #पेड़ #tree #दरख्त #प्यास #बाल्टी #bucket #रूह #महक #दो_प्रेमियों #प्रेमी #lovers #सोता_भाग #भाग #राहगीर #traveller #घर #पता #हिंदी #Hindi #Love #YQBaba #YQDidi #SaGa

21 MAY AT 2:00