#poetry

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..............घुसपैठिया............
   सबका अपना बन सबको छलता है वो.
   दिल के किसी कोने में बैठ,दिलों को भेद देता है वो
   बात का बतंगड़ बना,नुमाइशें करता है
   ये वो शक्स है जो घर-घर की टोह लेता है
   सबके सामने होकर भी अदृश्य रहता है
   सबका चहेता बन सबके दिलों में बसता है
   पर उसके दिल में कहाँ कौन बसताहै
   कहता कुछ,करता कुछ, दिल में कुछ,मन में कुछ,जहन में कुछ,
   जाने क्या क्या उधेड़ बुन करता है
   खामखाँ षड़यंत्रों के जाल बुनता है
   अक्सर ढूँढता है अपना सा कोई अक्स आस-पास ही
   अगर मिलता है उसको साथी कोई तो............
   पंचायतें होती है
   उनकी महफिलों में रिश्तों,बेबसी,मजबूरी 
    व जज्बातों की खिल्ली उड़ती है
   क्योंकि हर दिल से उसको 
  कोई न कोई बात जरूर मिलती है
  और किसी बात को बबाल बनाना उसे बखूबी आता है
   क्यों कि..............
   उसका दिल,दिमाग,पेट इसी खुराक से ऊर्जा पाता है
   और वह दिन व दिन तरोताजा होकर
   अपने चहरे की रौनक बड़ाता है
   इसलिए दोस्तों सावधान रहना एसे घुसपैठियों से
   क्योंकि ये कोई एलियन नहीं,रहता है इसी धरती पे
   और वह छिपा रहता है हमारे ही हितैषियों में।।

..............घुसपैठिया............ सबका अपना बन सबको छलता है वो. दिल के किसी कोने में बैठ,दिलों को भेद देता है वो बात का बतंगड़ बना,नुमाइशें करता है ये वो शक्स है जो घर-घर की टोह लेता है सबके सामने होकर भी अदृश्य रहता है सबका चहेता बन सबके दिलों में बसता है पर उसके दिल में कहाँ कौन बसताहै कहता कुछ,करता कुछ, दिल में कुछ,मन में कुछ,जहन में कुछ, जाने क्या क्या उधेड़ बुन करता है खामखाँ षड़यंत्रों के जाल बुनता है अक्सर ढूँढता है अपना सा कोई अक्स आस-पास ही अगर मिलता है उसको साथी कोई तो............ पंचायतें होती है उनकी महफिलों में रिश्तों,बेबसी,मजबूरी व जज्बातों की खिल्ली उड़ती है क्योंकि हर दिल से उसको कोई न कोई बात जरूर मिलती है और किसी बात को बबाल बनाना उसे बखूबी आता है क्यों कि.............. उसका दिल,दिमाग,पेट इसी खुराक से ऊर्जा पाता है और वह दिन व दिन तरोताजा होकर अपने चहरे की रौनक बड़ाता है इसलिए दोस्तों सावधान रहना एसे घुसपैठियों से क्योंकि ये कोई एलियन नहीं,रहता है इसी धरती पे और वह छिपा रहता है हमारे ही हितैषियों में।। पारुल शर्मा #Poem #poetry #घुसपैठिया # #YQBaba

33 SECONDS AGO

The corner chair
& me 
Poetry trapped inside
Waiting to be free
My Home for 
Few minutes 
Or maybe an hour 
Or Two
The corner Chair 
Walls like a mirror 
My muse today & as always 
Too many words ..
I sit back & 
Try to read
Words like 
Clouds hover Again
Ready to be spilled 
I let go the chaos within
I become one with poetry
The Corner Chair 
My home today & I lived each moment
Again 
By
Notyet100

The corner chair & me Poetry trapped inside Waiting to be free My Home for Few minutes Or maybe an hour Or Two The corner Chair Walls like a mirror My muse today & as always Too many words .. I sit back & Try to read Words like Clouds hover Again Ready to be spilled I let go the chaos within I become one with poetry The Corner Chair My home today & I lived each moment Again .. By Notyet100 #poem #poetry #YQBaba #notyet100 #photography

AN HOUR AGO

तेरे प्यार का असर दिख रहा है
    चाँद आजकल कुछ अलग दिख रहा है।
  हमने तो लिखा दिया तेरा नाम दिल में,ख्वाब में,हाथों में
       खुदा जाने क्या खबर लिख रहा है।

तेरे प्यार का असर दिख रहा है चाँद आजकल कुछ अलग दिख रहा है। हमने तो लिखा दिया तेरा नाम दिल में,ख्वाब में,हाथों में खुदा जाने क्या खबर लिख रहा है। पारुल शर्मा #Poem #poetry #चाँद #YQBaba

2 HOURS AGO