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👇बिना सर पैर के मुद्दे👇
(poem in the caption)

बिना सर पैर के मुद्दे देश के कुछ कोनो से उछाले जाते है बिना सर पैर के मुद्दे बेतहाशा तबाही का सैलाब लाते है नंगी सड़कों पर लाश बिछाते है बिना सर पैर के मुद्दे मज़हब के कंधों पर रखकर बंदूक चलाते है कभी जातिवाद का परचम लहराते है बिना सर पैर के मुद्दे सचाई को चबाते है इंसानियत निगल जाते है बिना सर पैर के मुद्दे रक्षक, भक्षक बन जाते है पीठ पीछे शोर मचाते है बिना सर पैर के मुद्दे कुछ फ़ायदा कमाते है कुछ बहलाते फुसलाते है बिना सर पैर के मुद्दे धरा को चोट पहुचाते है कहीं दंगे ये करवाते है बिना सर पैर के मुद्दे किसी को राजा बनाते है किसी की कब्र सजाते है बिना सर पैर के मुद्दे आग की तरह जलाते है सोच को ठेस पहुचाते है बिना सर पैर के मुद्दे दूर से ही दिख जाते है देश के कुछ कोनों से उछाले जाते है बिना सर पैर के मुद्दे #मुद्दे #issues #yqbaba #yqdidi #yqpoetry #NaPoWriMo #anshulwrites #hindi piyush mishra ji ki do line jo situation ko bahut suit karti hai Aaj ke jalson me Bismil ek gunga gaa raha. Aur behron ka wo rela naachta mehfil mein hai

29 MINUTES AGO

                 ' किताब'

मैं कभी किसी को तुम्हें उधार भी नहीं देता,
भला कोई अपनी महबूबा किसी को  उधार देता है
जब कभी तुम्हारे शब्दों को उसके अर्थों में घोलकर पी रहा होता हूँ तो तुम्हारा मौन दहाड़ रहा होता है 
तुम बड़ी बातूनी हो सोने ही नही देती,पर
तुम्हारे एक एक शब्द पर मैं कई कई रातें कुछ सेकेंडों में गुजार दिया करता हूँ,
तुम मेरे जीवन में रेडियो की आवाज़ की तरह हो जिसके बिना रेडियो कबाड़ हो जाता है
चलो तुम हो तो मैं जिंदा हूँ नहीं तो इस खामोश दुनिया में जहाँ लोगों के पास खुद के लिए वक्त नहीं मेरे लिए कौन निकालता।

'किताब' मन करता है तुम्हें बस देखता रहूं , फिर सोचता हूं कि तुम्हे नज़र लग गयी तो, फिर जी कहता है कि तुम्हें जोर से सीने से लगा लूं फिर कभी खुद से जुदा न होने दूं, फिर ख्याल आता है नहीं नहीं जो कहीं तुम्हारी सांस फूल गयी तो मैं तो मर ही जाऊंगा, तुम्हें जब किसी से बांटना पड़ता है न, बहुत गुस्सा आता है, तुम्हें कोई और कैसे छू सकता है तुम तो बस मेरी हो, मैं कभी किसी को तुम्हें उधार भी नहीं देता, भला कोई अपनी महबूबा किसी को उधार देता है। जब कभी तुम्हारे शब्दों को उसके अर्थों में घोलकर पी रहा होता हूँ तो तुम्हारा मौन दहाड़ रहा होता है । तुम बड़ी बातूनी हो सोने ही नहीं देती,पर तुम्हारे एक एक शब्द पर मैं कई कई रातें कुछ सेकेंडों में गुजार दिया करता हूँ तुम मेरे जीवन में रेडियो की आवाज़ की तरह हो , जिसके बिना रेडियो कबाड़ हो जाता है, और तुम्हारे शब्द रेडियो के RJ की तरह हैं, तुम्हारी भी कला अद्भुत है जब प्यास लगती है तो रुला देती हो , नींद आये तो हंसा देती हो थक जाओ तो सुला देती हो , चलो तुम हो तो मैं जिंदा हूँ नहीं तो इस खामोश दुनिया में जहाँ लोगों के पास खुद के लिए वक्त नहीं मेरे लिए कौन निकालता। Minakshi Mishra ji This is you inspired me. #worldbookday #विश्वपुस्तकदिवस #world #book #day #hindi #हिंदी #yqbaba #yqdidi

AN HOUR AGO