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14 quotes

आवाज़ मत लगाना।
मुड़ ना पाऊँगी,
रुक तो बिलकुल नहीं पाऊँगी। 

(कुछ काम हो मुझसे
या यु ही हो मिलने का मन
तो आघे बढ़ना
और साथ चल लेना।
क्या है ना, बेथ कर,
चाय पे चर्चा तो मुमकिन नहीं
ना चाय पसंद है, ना बैठना।
तुम्हे चलते हुए देखा है मैंने पहले,
दौड़ते हुए भी।
अच्छी तो है तुम्हारी गति।...)

Read the whole poem below⤵ आवाज़ मत लगाना। मुड़ ना पाऊँगी, रुक तो बिलकुल नहीं पाऊँगी। (कुछ काम हो मुझसे या यु ही हो मिलने का मन तो आघे बढ़ना और साथ चल लेना। क्या है ना, बेथ कर, चाय पे चर्चा तो मुमकिन नहीं ना चाय पसंद है, ना बैठना। तुम्हे चलते हुए देखा है मैंने पहले, दौड़ते हुए भी। अच्छी तो है तुम्हारी गति। मै तो शिखर की ओर निकली हूँ, सफर लंबा है, पानी कम है, खाना कुछ देर में खत्म हो जाएगा। पर कुछ ही दिन की बात है, रस्ते पे कमाई अच्छी हो जाएगी। तुम्हे तो पता है ना, नयी-नयी चीज़े बना कर बेचती रहती हूँ मैं। अच्छा कह ही देती हूँ अच्छे लगते हो तुम मुझे, तुम्हारे साथ वक़्त का भोज मेहसूस नहीं होता। तस्वीरे निकालना बंद करो मरी और हो सके तो साथ आ ही जाओ क्योकि रुक तो बिलकुल नहीं पाऊँगी।) -- #lovepoem #love #Rasik #original #trek #mountains #journey #poemgram #green #nature #photography #naturewalk #himachal

15 FEB AT 20:36