"Lafz milte toh bol sakte... Yaha toh Jazbaat kam par rahe hai...Meri kya majaal ki main bayaan karne ki jurrat karoo... Yaha toh Alfaaz Kam par rahe Hai"
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Soham Majumdar started writing when he was in class 7... read more
जिंदगी का कर्जा जो
हम पे भारी पर गया
क्या हश्र हुई है देखो अब
अंजना सा मर्ज जो
हम पे हावी हो गया
खुल के साँसें लेंगे जाने कब-
যেদিন নাম না জানা অন্ধকার গ্রাস করবে আমাকে আর আমি উড়ে যাবো গাঙচিল এর মত এক নতুন আলোর দিকে আবার নতুন বার্তা নিয়ে তোর ই পথে.. পাথেয় শুধু তোর ই দেওয়া ডাকনাম
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Bepaak darare kabhi laqeere hua karta tha
Us aabroo ki chilman me kabhi main bhi jiya karta tha
Waqt ki tarazu bari beraham nikli
Haal bhi toh kabhi Maazi hua karta tha
~ Mustakbil-
तू थाम लेना मुझे बैसे ही
जैसे थामे पत्ते शाखों को
मैं खिल उठूं ऐसे तुझमें ही
जैसे फूल चाहे तितली को
बरस जाओ तुझ पे इस कदर
जैसे कोई बंजर जमीन पे
बूंदों ने आयत की तरह
बिखरा था यकीन बन के-
Chand tara ke proshno kori
Tomra dekhecho ki takey
Dhrubotara porey khoshe
Niswaseri faakey
Keno e aakash kalo
Nimeshe mon haralo
Shudhu je bashlo bhalo e tomai
O piyaa... Laagey na mora jia
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Aayenagulor chaaya kanche
Bayenagulor chonwa ache
Tori chobi shey je aankey barbar-
পুড়ে ছাই উড়ে তাই চলে যাক দূর
নিশি রাত বেঁচে থাক চেনা সেই সুর
বলে ওই উড়ো খই মরু বালি রাশি
জীবনের উদ্দেশ্যে আজও বেঁচে আছি
#Khoi-
রাতের দোহাই দিও না আমায়
সন্ধ্যা এখনো বাকি
ঝড়া পাতা কত কি যে বলে যায়
দিয়ে যায় সে যে ফাঁকি-
" Ochena Rupkatha , shey toh chup katha,
Hariye tomai aaj, harabar betha ;
Fairy tales er, kono pata theke -
Esechile tumi,chinhota rekhe choley gecho durey, kon swapnopurey
Neverland e...firbena kokhono "-